दिन के 10 बजकर पन्द्रह मिनट होने वाला है. नंदनवन के उच्चन्यायालय मे जज (झबड़ा भालू) के आने का समय हो गया था. न्यायलय परिसर मे एक ईँच भी खाली जगह नही था. चारो तरफ सन्नाटा लेकिन नेप्थ्य से कानाफुसी की आवाज. फुल धुप मे भी अधखिले थे मानो इस मुकदमे की गँभीरता अन्हेँ हँसने से मना कर रहा हो. झबड़ा भालू आज एक ऐतिहासिक और विचित्र सा मुकदमा पर अपना फैसला सुनाने वाला था. मामला था पप्पी नामक कुतिया और शेरु नामक कुत्ते के तलाक का. चूकि शेरु ने तलाक दिया था... इसीलिए पप्पी ने मुकदमा दायर किया था कि उसे वकायदे पुरा गुजारा भत्ता दिया जाए. लेकिन शेरु का अपना तर्क था औरा और मामला दो कुत्ते से हँटकर अब दो वकीलों (जोजो और बोजो नामक दो सियार)पर आ टिका था.
हम अभीए लौटते हैँ. ज्यादा नरभसाईएगा नही.
क्रमशः ...
Wednesday, March 21, 2007
एक विचित्र सा मुकदमा
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