tag:blogger.com,1999:blog-12011694.post112566894716083752..comments2007-02-23T23:11:18.853-08:00Comments on मेरी डायरी : पद्मनाभ मिश्र: मेरा गाँव, गाँव का चौपाल और बिजलीपद्मनाभ मिश्रnoreply@blogger.comBlogger6125tag:blogger.com,1999:blog-12011694.post-1127016711320735182005-09-17T21:11:00.000-07:002005-09-17T21:11:00.000-07:00"सुश्री जया झा" के पन्नो पर, अन्तर्जाल के पाठकों ...<A HREF="http://jayajha.blogspot.com" REL="nofollow">"सुश्री जया झा" </A> के पन्नो पर, अन्तर्जाल के पाठकों के लिए, साहित्य का अनुठा संग्रह उपलब्ध है . मेरे ख्याल से बहुत से चिट्ठाकार उनकी संग्रह का पुनर्प्रकाशन करते हैं. अच्छी बात है कम से कम साहित्य की अनवरतता बनी रहती है. लेकिन इस अनुठे संग्रह के लिए धन्यवाद की पात्रा हैं वह जो चिट्ठाकारों को विषय प्रदान करती हैं.पद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-12011694.post-1126937706735321402005-09-16T23:15:00.000-07:002005-09-16T23:15:00.000-07:00मिश्रजी, आपके ब्लॉग पर हिन्दी कविता पढ़कर आनन्द आ ग...मिश्रजी, आपके ब्लॉग पर हिन्दी कविता पढ़कर आनन्द आ गया । आशा है कि भविष्य में भी कवि पद्मनाभ मिश्रजी की रचनाओं से पाठकगण लाभान्वित होंगे । Keep up the good work :-)Narenhttp://www.blogger.com/profile/03936066889221997939noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-12011694.post-1126088935953778192005-09-07T03:28:00.000-07:002005-09-07T03:28:00.000-07:00यह जीवन्त वर्णन पढ़कर अपने गॉंव की याद आ गयी।यह जीवन्त वर्णन पढ़कर अपने गॉंव की याद आ गयी।Pratikhttp://www.blogger.com/profile/05916809002207296203noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-12011694.post-1125819372880886912005-09-04T00:36:00.000-07:002005-09-04T00:36:00.000-07:00अभी मैं हिन्दी ब्लोग की दुनियाँ मे बिल्कुल नौसिखिय...अभी मैं हिन्दी ब्लोग की दुनियाँ मे बिल्कुल नौसिखिया हूँ. वैसे मेरी मातृभाषा मैथिली है. मैथिली की अपनी एक विशेषता है. इसमे क्रिया शब्द मे स्त्रीलिंग-पूलिंग का कोई अन्तर नहीं होता है. जैसे--- गाडी आबि रहल अछि.( अनुवाद-- गाडी आ रही है). यहाँ पर "रही" और "रहा" दोनो के लिए "आबि" शब्द क प्रयोग आता है. <BR/><BR/>यहाँ पर इस बात क प्रसंग केवल इतना है कि चूकि मे १०वीं तक की पढाई मैथिली मे किया हूँ इसीलिए बहुत संभव है स्त्रीलिंग-पूलिंग लिखने मे गलतीयाँ होंगी. हिन्दी चिट्ठाकार के इस समुह मे मेरा हिन्दी सुधरेगा ऐसा मेरा विश्वाश है.पद्मनाभ मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/00743001936020943683noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-12011694.post-1125741548261675902005-09-03T02:59:00.000-07:002005-09-03T02:59:00.000-07:00पद्मनाभ जी , कविता बहुत सात्विक लगी । "गाँव को क्य...पद्मनाभ जी , कविता बहुत सात्विक लगी । <BR/>"गाँव को क्यों छोडा यही खयाल आता है "अनुनाद सिंहhttp://www.blogger.com/profile/05634421007709892634noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-12011694.post-1125724471077712772005-09-02T22:14:00.000-07:002005-09-02T22:14:00.000-07:00कुमार जी यह कविता बहुत अच्छी लगी. क्या बिजली के आन...कुमार जी यह कविता बहुत अच्छी लगी. क्या बिजली के आने से केवल यही दुख है कि बिजली का खम्बा है पर बिजली नहीं है? बिजली आना शायद आधुनिकता से मिलन की भी तो कहानी है, जिससे जीवन, रहने के ढ़ंग, आदि बदल जाते हैं. सुनीलSunil Deepakhttp://www.blogger.com/profile/05781674474022699458noreply@blogger.com